Tuesday, June 21, 2016

यूरोपियन यूनियन से 23 जून को अलग होने पर फैसला करेगा ब्रिटेन


नई दिल्ली : आगामी 23 जून को ब्रिटेन के लोग अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला लेने वाले हैं। ब्रिटेन के 6 करोड़ लोगों का ये फैसला 128 करोड़ भारतीयों के जीवन पर भी असर डाल सकता है। इसलिए आज हमने ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के बीच संभावित इंटरनेशनल तलाक का एक DNA टेस्ट करने का फैसला किया है। ब्रिटेन के लोग वोटिंग के ज़रिए 23 जून को इस बात का फैसला लेंगे कि वो यूरोपियन
यूनियन से अलग होना चाहते हैं या नहीं. यूरोपियन यूनियन 28 देशों का एक ऐसा समूह हैं जिसमें शामिल देश आपस में फ्री ट्रेड यानी मुक्त व्यापार करते हैं। EU में शामिल देशों के नागरिक 28 देशों में से किसी भी देश में रह सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं। यूरोप के देशों को साथ लाने की पहल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई थी और इसका मकसद था, यूरोप के देशों में फैले उग्र राष्ट्रवाद से निपटना।

-1957 में Treaty Of Rome के तहत European Economic Community की स्थापना की गई। 
-उस वक्त EEC में 6 देश शामिल थे और 1973 से EEC का सदस्य बनने वाले देशों की संख्या बढ़ने लगी।
-1973 में डेनमार्क और आयरलैंड के साथ ब्रिटेन भी European Economic Community का सदस्य बन गया। 
-1992 में औपचारिक तौर पर European Union का गठन किया गया जिसमें फिलहाल ब्रिटेन सहित 28 देश शामिल हैं।
-लेकिन अब ब्रिटेन में European Union से अलग होने की मांग तेज़ हो गई है। ब्रिटेन के Daily Express नामक अखबार ने अपने एक सर्वे के ज़रिए दावा किया है कि ब्रिटेन में रहने वाले 80 प्रतिशत लोग European Union से अलग होना चाहते हैं।
-ब्रिटेन और European Union के इस अलगाव को ShortForm में Brexit कहा जा रहा है। ये Term दो शब्दों को मिलाकर बनी है पहला है Britain और दूसरा Exit यानी Brexit का मतलब है Britain का Exit यानी बाहर जाना।

-इन दिनों पूरे ब्रिटेन में सिर्फ इसी बात की चर्चा हो रही है कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन में रहना चाहिए या नहीं। 
-ये बहस मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटी है।
-Brexit का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि EU से अलग हो जाने पर ब्रिटेन में प्रवासी संकट पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
-आपको बता दें कि इस वक्त ब्रिटेन में हर रोज़ 500 प्रवासी दाखिल होते हैं और पूर्वी यूरोप के करीब 20 लाख लोग इस वक्त ब्रिटेन में रह रहे हैं।
-जबकि Brexit का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इससे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा।
-confederation of british industry के मुताबिक EU से अलग होने पर 9 लाख 50 हज़ार ब्रिटिश नागरिकों की नौकरियां जा सकती है।
-जबकि EU से अलग होने की मांग कर रहे लोगों का तर्क है कि इससे ब्रिटेन को 99 हज़ार 300 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत होगी। ये रकम ब्रिटेन को EU में बने रहने के लिए मेंबरशिप Fees के रूप में चुकानी पड़ती है। 

इसी तरह अलग होने का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि प्रवासियों की वजह से स्थानीय लोगों की नौकरियां संकट में है क्योंकि पूर्वी यूरोप के गरीब देशों से आने वाले नागरिक ब्रिटेन में कम सैलरी पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। यहां आपको बता दें कि  यूरोपियन यूनियन के तहत आने वाले 28 देशों में कुल 50 करोड़ लोग रहते हैं, और ये लोग Free Border Policy के तहत यूरोप के किसी भी देश में बस सकते हैं, व्यापार कर सकते हैं और सरकार की तरफ से मिलने वाले लाभ भी हासिल कर सकते हैं। 

-यूरोपियन यूनियन की राजधानी बेल्जियम के ब्रसेल्स में है। जहां EU से जुड़े कामकाज को देखने के लिए 90 इमारतों का इस्तेमाल होता है।
-यूरोप के लोगों के लिए कानून बनाने का काम European पार्लियामेंट और Council of the European Union संयुक्त रूप से करती है..लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि European पार्लियामेंट की ताकत Council of the European Union के मुकाबले काफी कम है।
-क्योंकि European पार्लियामेंट कानूनों में संशोधन और बदलाव का सुझाव तो दे सकती है लेकिन इसे मानना या ना मानना Council of the European Union के हाथ में है। 
-इसी वजह से European Union के कामकाज पर अफसरशाही हावी है और ये बात ब्रिटेन के लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं है। 

EU से अलग होने की मांग कर रहे लोगों का तर्क है कि European Union तानाशाही रवैया अपनाती है और यही ब्यूरोक्रेट्स ब्रिटेन सहित 28 देशों के लोगों का भविष्य तय करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक EU के लिए करीब 10 हज़ार अफसर काम करते हैं। इनमें से कई पूर्व राजनेता भी हैं। अपने देश में राजनीतिक पारी खत्म होने के बाद ये नेता EU का हिस्सा बन जाते हैं। European Union का कामकाज देखने वाले अफसरों और सांसदों को मोटी सैलरी भी मिलती है।

-Brexit की मांग कर रहे लोगों का दावा है कि EU में काम करने वाले ज्यादतर अफसरों की सैलरी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से भी ज्यादा है। 
-इन अफसरों को Relocation allowance, Household allowance, Family allowance, Entertainment allowance, Private Healthcare allowance और बच्चों के लिए Education allowance के रूप में मोटी रकम मिलती है। 
-इसी तरह European संसद के सांसदों को 19 हज़ार रुपये का दैनिक भत्ता मिलता है और साल भर में अलग-अलग तरह के खर्च के लिए 31 लाख रुपये मिलते हैं।
-जबकि स्टाफ रखने के खर्च के नाम पर इन सांसदों को साल भर में 1 करोड़ 70 लाख रुपये अलग से मिलते हैं।
-हैरानी की बात ये है कि इस कमाई पर सांसदों को आम लोगों के मुकाबले कम टैक्स चुकाना पड़ता है। European संसद के सांसदों के लिए Tax दर 8 से 24 प्रतिशत के बीच है।
-Brexit का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि ये सुविधाएं, जनता के पैसों से दी जा रही हैं और अफसरशाही की वजह से आम जनता से फैसले लेने का हक़ भी छीन लिया गया है।
-ब्रिटेन के European Union से अलग हो जाने का असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ेगा।

EU से अलग होने के फैसले का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

-विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन अगर EU से अलग हो जाता है तो एक Pandora's Box खुल सकता है। यानी ब्रिटेन की देखा-देखी दूसरे देश भी EU छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।
-वैसे ब्रिटेन EU के साथ समझौते की कोशिश भी कर सकता है जिसके तहत ब्रिटेन को कुछ विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं, अगर ऐसा होता है तो प्रवासियो को ब्रिटेन में आने के 4 वर्षों के बाद ही सरकार से मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे।
-प्रवासी अपने बच्चों के लिए सरकार से लाभ की मांग नहीं कर पाएंगे।
-अपराधियों को उनके देश वापस भेजा जाएगा।
-EU का सदस्य बनने वाले नए देशों के लोगों को ब्रिटेन में तुरंत एंट्री नहीं मिल पाएगी।
-EU से अलग होने के बाद ब्रिटेन भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार कर पाएगा जिससे भारत और ब्रिटेन दोनों को फायदा होगा।
-अलग होने के बाद ब्रिटेन अमेरिका जैसे देशों के साथ भी Free Trade Agreement कर पाएगा। हालांकि Brexit से ब्रिटेन में काम कर रही 800 भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है।
-यानी 23 तारीख को होने वाली वोटिंग ब्रिटेन की ही नहीं दुनिया की तस्वीर भी हमेशा के लिए बदल सकती है।

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