Wednesday, June 15, 2016

देश को बड़े BANK की जरुरत, SBI में मर्ज होंगे 5 एसोसिएट बैंक

सरकार ने देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में उसके पांच अनुषंगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय के प्रस्ताव को बुधवार को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी। लेकिन, इस प्रस्ताव को एक बार फिर मंत्रिमंडल के समक्ष लाना पड़ेगा क्योंकि कुछ कानूनी पहलुओं का समाधान किया जाना बाकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि इस संबंध में वित्त मंत्रालय अलग से बताएगा।
ये समस्याएं होंगी खत्म
एसबीआई के प्रबंध निदेशक एवं समूह कार्यकारी वी. जी. कन्नन एक निजी टेलीविजन चैनल से कहा कि सरकार ने उनके बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है और मार्च 2017 तक विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। उन्होंने कहा कि अब अनुषंगी बैंकों के मूल्याकंन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी जो दो महीने में पूरी होगी। कन्नन ने कहा कि विलय से डुप्लिकेसी के साथ ही जमा लागत भी कम होगी और एक ही स्थान पर कई बैंकों की शाखाएं होने की समस्या से भी निटपने में मदद मिलेगी।
इन बैंकों का होगा विलय
एसबीआई के पांच अनुषंगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद शामिल है।
वित्त मंत्री ने बताई थी बड़े बैंक की जरुरत
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैंक अधिकारियों के दूसरे वार्षिक सम्मेलन ज्ञान संगम में कहा था कि देश को अधिक संख्या में बैंक के स्थान पर बड़े बैंकों की जरूरत है। पिछले महीने एसबीआई के निदेशक मंडल ने अपने पांच अनुषंगी बैंकों के विलय का प्रस्ताव दिया था। इन बैंकों के विलय का उद्देश्य न सिर्फ एक बड़ा बैंक बनाना है बल्कि इन सभी के लिए एक ही प्लेटफार्म भी होगा।
2008 और 2010 में भी हुआ था विलय
इस विलय से एसबीआई का कुल कारोबार 37 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच जायेगा और उसकी शाखाओं की संख्या भी 22500 होने के साथ ही एटीएम की संख्या भी 60 हजार हो जाएगी। एसबीआई की अभी 16500 शाखायें है और दुनिया के 36 देशों में 199 कार्यालय है। वर्ष 2008 में स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का और वर्ष 2010 में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का एसबीआई में विलय हुआ था।

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