Thursday, July 7, 2016

रिजर्व बैंक का ऑडिट करना चाहता है सीएजी!


भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) शशि कांत शर्मा ने कहा है कि वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की लेखा परीक्षा की जरूरत पर बहस होनी चाहिए ताकि धोखाधड़ी आदि से निपटने की उनकी क्षमता को आंका जा सके। सार्वजनिक रूप से कम ही सामने आने वाले शर्मा ने केंद्रीय बैंक और देश की बैंकिंग व्यवस्था के बारे में एक नई बहस छेड़ दी है। उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा वित्तीय और कॉरपोरेट धोखाधड़ी पर नई दिल्ली में
आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जैसे वित्तीय नियामकों की सीएजी ऑडिट पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कथित खराब कर्ज का बड़ा हिस्सा विदेश में हो सकता है, और फिर शायद उसकी वसूली कभी न हो सके।  हालांकि इस तरह के प्रस्ताव पहले भी आए हैं, लेकिन सीएजी की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र इस समय कुछ दबाव से गुजर रहा है और ऐसा खराब कर्ज की वजह है। साथ ही सरकार रिजर्व बैंक के नए गवर्नर के चयन की प्रक्रिया चला रही है, जिसकी नीतियों की कुछ तिमाहियों से आलोचना हो रही है।

मई में 3 साल कार्यकाल पूरा कर चुके शर्मा ने ब्रिटेन और अमेरिका जैसे मजबूत बाजारों का भी हवाला दिया, जहां इन मसलों पर बेहतर तरीके से निपटा जाता है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका तथा ब्रिटेन के उदारहण लिए जा सकते हैं, जहां वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा रही है। भारत में सीएजी, रिजर्व बैंक की जांच नहीं करता, जिसके ऑडिटरों की नियुक्ति रिजर्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार करती है। वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए इस पर विचार किया जाना चाहिए। हमारी ऑडिट से जोखिम और कमजोरियों की जांच हो सकती है, जिससे वित्तीय क्षेत्र जूझ रहा है। साथ ही ऐसे जोखिम के मामले में इससे बचने के लिए नियामक की प्रभावशीलता और क्षमता की भी जांच हो सकती है।'

शर्मा ने कहा कि नियामकों की जांच का अंतरराष्ट्रीय प्रचलन बढ़ रहा है।  उन्होंने कहा, 'वित्तीय क्षेत्र में नियामकों की कार्यप्रणाली व प्रभावशीलता के संबंध में आश्वस्तता का वांछित स्तर होना ही इसका लक्ष्य होना चाहिए।' उद्योग जगत ने इस विचार पर सधी हुई टिप्पणी दी है। येस बैंक के ऑडिट एवं मैनेजमेंट गवर्नेंस के ग्रुप प्रेसीडेंट देवमाल्य डे ने कहा, 'हालांकि यह अलग विचार है। इस पर समय के साथ बहस और चर्चा होनी चाहिए कि हम ऐसा किस तरह से कर सकते हैं।' 

देश के 12वें सीएजी ने हवाला दिया कि किस तरह से उन्नत वित्तीय व्यवस्था जैसे अमेरिका और ब्रिटेन अपने केंद्रीय बैंक की गैर मौद्रिक नीतियों के कार्य की नजदीक से जांच कर रहे हैं। सीएजी ने कहा, 'अमेरिका में जीएओ (गवर्नमेंट एकाउंटेबिलिटी ऑफिस), जो भारत के सीएजी की तरह है, 1978 तक फेडरल बैंक की जांच नहींं करता था। 78 के बाद से इसे फेड के नियामकीय दायित्वों एवं भुगतान व्यवस्था की समीक्षा का अधिकार मिला। हालांकि अभी भी मौद्रिक नीति पर विचार विमर्श, फैसलों और कार्रवाइयों की समीक्षा का अधिकार नहीं है। लेकिन 2009 के वित्तीय संकट के तत्काल बाद अमेरिकी कॉग्रेस ने जीएओ द्वारा व्यक्तिगत कंपनियों को दिए गए कर्ज की ऑडिट की अनुमति दे दी।' 

2012 के बाद फेड के आंतरिक नियंत्रण, अतिरिक्त नीतियों, कॉन्ट्रैक्टर के इस्तेमाल व अन्य गतिविधियों की समीक्षा की भी अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि इस समय बहस हो रही है कि जीओए को फेड की सभी गतिविदियों और नियामकीय ढांचे की जांच की अनुमति दी जाए। ब्रिटेन में ऐतिहासिक  रूप से बैंक आफ इंगलैंड ऑडिटिंग संस्थान एनएओ (नैशनल ऑडिट ऑफिस) के दायरे से बाहर रहा है। बहरहाल हाल ही में मई 2016 में एक अधिनियम पारित हुआ है। इसके मुताबिक बैंक आफ इंगलैंड को अपने ऑडिटरोंं की नियुक्ति के लिए निश्चित तौर से नियंत्रक से संपर्क करना होगा। संपत्तियों के दबाव में होने के मसले पर सीएजी ने कहा कि हाल के दिनों में बैंकों के खिलाफ की जाने वाली धोखाधड़ी पर ध्यान दिया जाने लगा है, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मामले में, जो इस समय गैर निष्पादित संपत्तियां बढऩे के संकट से जूझ रहे हैं। 

No comments:

Post a Comment

www.kiranbookstore.com

http://kiranprakashan.blogspot.in/
http://spardhaparikshahelp.blogspot.in/
http://advocate-vakil.blogspot.in/
http://bankexamhelpdesk.blogspot.in/
http://kicaonline.blogspot.in/
http://previous-questionpapers.blogspot.in/
http://freecareerhelp.blogspot.com/
http://kiranworkfromhome.blogspot.in/
http://kp-ahmedabad.blogspot.in/
http://kp-pune.blogspot.in/
http://kirancompetitivecurrentevents.blogspot.in/
http://iwantgovernmentjob.blogspot.in/
http://staffselectioncommission.blogspot.in/
http://pradeepclasses.blogspot.in/
http://rajasthan-government-jobs.blogspot.in/
http://medical-government-jobs.blogspot.in/
http://it-government-jobs.blogspot.in/
http://engineering-government-jobs.blogspot.in/
http://mp-government-jobs.blogspot.com/
http://punjab-government-jobs.blogspot.in/
http://tamil-nadu-government-jobs.blogspot.in/
http://karnataka-government-jobs.blogspot.in/
http://up-government-jobs.blogspot.in/
http://west-bengal-government-jobs.blogspot.in/
http://central-government-jobs.blogspot.in/
http://bihar-government-jobs.blogspot.in/
http://gujarat-government-jobs.blogspot.com/
http://maharashtra-government-jobs.blogspot.in/
http://government-jobs-kiran.blogspot.in/
http://sarkari-naukri-kiran.blogspot.in/
http://competitiveexamhelp.blogspot.in/
http://kiraninstituteforcareerexcellence.blogspot.com/
http://mpschelp.blogspot.com/
http://competitivemaths.blogspot.in/
http://competitiveenglish.blogspot.in/
http://competitivecurrentaffair.blogspot.in/
http://reasoningexams.blogspot.in/
http://teacherexams.blogspot.in/
http://policeexams.blogspot.in/
http://railwayexams.blogspot.com/
http://competitivegeneralstudies.blogspot.in/
http://ksbms.blogspot.in/
http://kirancurrentaffairs.blogspot.in/
http://upscmpsc.blogspot.in/
http://www.kirannews.in/
http://www.pratiyogitakiranonline.com/
http://ap-andhrapradesh-jobs.blogspot.in/