Thursday, July 7, 2016

अमेरिका ने मानवाधिकार हनन को लेकर उत्तर कोरियाई नेता पर लगाया प्रतिबंध


वाशिंगटन। अमेरिका ने उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों के घोर हनन के मामलों की एक लंबी फेहरिस्त के लिए देश के नेता किम जुंग उन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए आज उनका नाम प्रतिबंधों की काली सूची में डाल दिया। किम को पहली बार काली सूची में डालते हुए अमेरिका ने कहा कि यह इस बात का संज्ञान लेना है कि उत्तर कोरिया दुनिया के सर्वाधिक दमनकारी देशों में शामिल है। प्रतिबंधों की सूची में किम तथा दस अन्य शीर्ष
अधिकारियों के नामों को शामिल किया गया है और आरोप है कि ये लोग देश में राजनीतिक कैदी शिविरों में राजनीतिक कैदियों को प्रताडि़त करने और हत्याओं समेत गंभीर मानवाधिकारों के हनन में शामिल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

आतंकवाद और वित्तीय खुफिया विभाग के कार्यवाहक राजस्व उप मंत्री एडम जुबिन ने कहा कि  किम जुंग उन के शासनकाल में उत्तर कोरिया ने अपने लाखों लोगों को बेइंतिहा यातनाएं दी हैं जिनमें न्यायेत्तर हत्याएं , जबरन श्रम तथा प्रताडऩा भी शामिल है।

मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम देश के गृह सुरक्षा तथा लोक सुरक्षा मामलों के प्रमुख की अपनी भूमिका में मानवाधिकारों के हनन के लिए जिम्मेदार हैं।

वाशिंगटन में अधिकारियों के अनुसार उत्तर कोरिया के गृह सुरक्षा मंत्रालय ने राजनीतिक कैदी शिविरों में 80 हजार से लेकर 120,000 कैदियों को रखा, उन्हें मौत की सजा दी, यौन प्रताडऩा दी, भूखे मारा और उनसे गुलामों की तरह काम करवाया जाना आम बात रही है।

अमेरिका ने कहा है कि किम की निगरानी में काम करने वाला लोक सुरक्षा मंत्रालय पुलिस स्टेशनों, हिरासत केंद्रों और श्रम शिविरों का एक ऐसा नेटवर्क चलाता है जहां संदिग्धों को पूछताछ के लिए रखा जाता है और उन्हें प्रताडि़त किया जाता है।

अमेरिकी प्रशासन ने पहली बार मानवाधिकारों में सीधे तौर पर शामिल रहे अन्य शीर्ष नेताओं की पहचान की है जिनमें लोक सुरक्षा मंत्री चोई पू इल, इसी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी री सोंग छुल तथा गृह सुरक्षा मंत्रालय के साथ जुड़े ब्यूरो निदेशक कांग सोंग नाम शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट साफ कहती है कि मानवाधिकार हनन के अधिकतर मामलों में किम अंतिम रूप से जिम्मेदार हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट के बाद ये प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत सूची में शामिल लोगों की संपत्ति को सील कर दिया जाएगा और अमेरिकी उनके साथ कोई कारोबार नहीं कर सकेंगे।

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