Thursday, August 4, 2016

राज्यसभा में जीएसटी विधेयक पारित, कर क्षेत्र में सबसे बड़े सुधार का मार्ग प्रशस्त


नई दिल्ली। आजादी के बाद देश में कर क्षेत्र के सबसे बड़े सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हुए राज्यसभा ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवाकर जीएसटी विधेयक को संपूर्ण समर्थन के साथ पारित कर दिया। जीएसटी कर प्रणाली के अमल में आने से केन्द्र और राज्य के स्तर पर लागू विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष कर इसमें समाहित हो जाएंगे और पूरा देश दुनिया का सबसे बड़ा साझा बाजार बन जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी ने राज्यसभा में जीएसटी विधेयक पारित किए जाने पर सभी दलों के नेताओं और सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए इसे सही मायनों में एक एतिहासिक क्षण और सहयोगपूर्ण संघवाद का सबसे अच्छा उदाहरण बताया। मोदी ने ट्वीटर पर कहा कि हम सभी दलों और राज्यों के साथ मिलकर एक ऐसी प्रणाली लागू करेंगे जो कि सभी भारतीयों के लिए लाभदायक होगी और देश को जीवंत साझे बाजार के रूप में आगे बढ़ाएगी। वस्तु एवं सेवाकर की व्यवस्था को लागू करने वाले 122वें संविधान संशोधन को आज राज्यसभा में सात घंटे से अधिक चली बहस के बाद सदन में उपस्थित सभी सदस्यों के पूर्ण समर्थन से पारित कर दिया गया। कांग्रेस के बी. सुब्बारामी रेड्डी के संशोधनों के प्रस्ताव को सदन ने एकमत से खारिज कर दिया। अन्नाद्रमुक के सदस्य मतविभाजान के समय सदन से बाहर चले गए थे। उद्योग जगत ने राज्यसभा में जीएसटी के पारित होने का स्वागत किया और कहा कि इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और कारोबार की सुगमता बढ़ेगी।

जीएसटी संशोधन विधेयक लोकसभा द्वारा पिछले साल मई में पारित कर दिया गया था लेकिन राज्यसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की आपत्तियों के कारण अटक गया था और इसे एक प्रवर समिति के पास भेजा गया था। राज्यसभा ने संशोधित रूप में पारित किया है और अब यह संशोधित विधेयक लोकसभा में पेश किया जाएगा जहां राजग का बहुमत है।

जेटली ने संविधान 122वां संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मार्गदर्शक सिद्धान्त होगा कि जीएसटी दर को यथासंभव नीचे रखा जाए। निश्चित तौर पर यह आज की दर से नीचे होगा। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के दबाव के बावजूद किसी खास दर का उल्लेख नहीं किया।

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी कर की दर जीएसटी परिषद द्वारा तय की जाएगी। इस परिषद में केन्द्रीय वित्त मंत्री और सभी 29 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने शून्य के मुकाबले 203 मतों से विधेयक को पारित कर दिया। साथ ही इस विधेयक पर लाए गए विपक्ष के संशोधनों को खारिज कर दिया गया।

यह विधेयक लोकसभा में पहले पारित हो चुका है। चूंकि, सरकार की ओर से इसमें संशोधन लाए गए हैं, इसलिए अब संशोधित विधेयक को लोकसभा की मंजूरी के लिए फिर भेजा जाएगा।

कांगे्रस ने इस विधेयक को लेकर अपने विरोध को तब त्यागा जब सरकार ने एक प्रतिशत के विनिर्माण कर को हटा लेने की उसकी मांग को मान लिया। साथ ही इसमें इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्यों को होने वाली राजस्व हानि की पांच साल तक की भरपाई की जाएगी।

संशोधित प्रावधानों के अनुसार जीएसटी परिषद को केन् एवं राज्यों अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच आपस में होने वाले विवाद के निस्तारण के लिए एक प्रणाली स्थापित करनी होगी।

जीएसटी दर की सीमा को संविधान में रखने की मांग पर जेटली ने कहा कि इसका निर्णय जीएसटी परिषद करेगी जिसमें केन् एवं राज्यों का प्रतिनिधित्व होगा।

जीएसटी का महंगाई पर प्रभाव पडऩे के मुद्दे पर जेटली ने कहा उपभोक्ता मूलय सूचकांक की गणना में शामिल 54 प्रतिशत वस्तुओं पर कर से छूट है और अन्य 32 प्रतिशत पर कर की कम दर है। केवल 15 प्रतिशत पर ही मानक दर से कर लगेगा।

इससे पहले विधेयक पे करते हुए वित्त मंत्री अरू जेटली ने इसे ऐतिहासिक कर सुधार बताते हुए कहा कि जीएसटी का विचार वर्ष 2003 में केलकर कार्य बल की रिपोर्ट में सामने आया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट में जीएसटी के विचार को सार्वजनिक तौर पर सामने रखा था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में जीएसटी के बारे में एक विर्म पत्र रखा गया। बाद में सरकार ने राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक अधिकार संपन्न समिति बनाई थी। वर्ष 2014 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने इससे संबंधित विधेयक तैयार किया था किन्तु लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के कार वह विधेयक निरस्त हो गया।

जेटली ने कहा कि मौजूदा सरकार इसे लोकसभा में लेकर आई और इसे स्थाई समिति में भेजा गया। बाद में यह राज्यसभा में आया और इसे प्रवर समिति के पास भेजा गया।
जेटली ने कहा कि इस विधेयक को लेकर राज्य के वित्त मंत्रियों की बैठक में व्यापक स्तर पर सहमति तैयार करने की को िकी गई। आज अधिकतर राज्य सरकारें और विभिन्न राजनीतिक दल इसका समर्थन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जीएसटी का मकसद भारत को एक बाजार के रूप में समन्वित करना और कराधान में एकरूपता लाना है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से पीने वाले अल्कोहल को बाहर रखा गया है तथा पेट्रोलियम उत्पादों के बारे में जीएसटी परिषद तय करेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद के फैसलों में दो तिहाई मत राज्यों का और एक तिहाई मत कें का होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी से कें और राज्यों का राजस्व बढ़ेगा, साथ ही कर अपवंचना कम होगी।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि विवाद होने की स्थिति में जीएसटी परिषद ही विवादों का निस्तार करेगी। यदि परिषद में विवादों का समाधान नहीं हो पाता है तो उसके समाधान के लिए परिषद ही कोई तंत्र तय करेगी।

कांगे्रस द्वारा वित्त मंत्री से जीएसटी के संबंध में सीएसटी और आईसीएसटी के सन्दर्भ में लाए जाने वाले विधेयकों के धन विधेयक नहीं होने का आश्वासन मांगे जाने पर जेटली ने कहा कि वह इस संबंध में कोई भी आश्वासन देने की स्थिति में नहीं हैं।

जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद ने अभी तक विधेयक का मसौदा तैयार नहीं किया है। इस मुद्दे पर परिषद में कोई विचार विमर्श भी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों की सिफारिशों का पूर्वानुमान लगाकर वह कैसे कोई आश्वासन दे सकते हैं।

हालांकि जेटली ने कहा कि वह इस बात का आश्वासन दे सकते हैं कि इस संबंध में लाए जाने वाले विधेयक संविधान और परम्पराओं के अनुरूप होंगे। उन्होंने कहा कि इस बारे में राजनीतिक दलों से विचार विमर्श किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि अब सरकार केन्द्र द्वारा लागू किए जाने वाले जीएसटी के लिए सीएसटी विधेयक तथा विभिन्न राज्यों के बीच लगाए जाने वाले कर के लिए आईएसटी विधेयक भी सरकार लाएगी। साथ ही जीएसटी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के लिए 50 प्रतिशत राज्य विधायिकाओं से मंजूरी ली जानी है।

कांगे्रस सदस्यों ने इस बात पर विशेष आपत्ति जताई कि सरकार अगले सत्र में जो दो विधेयक लाएगी, वे धन विधेयक नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात का आश्वासन देना चाहिए।

Tags : #Rajya Sabha #passes #historic GST Constitution Bill

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