Wednesday, December 21, 2016

दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों के राजभाषा सम्मेालन का हैदराबाद में आयोजन

दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों के राजभाषा सम्मेालन का हैदराबाद में आयोजन दिनांक 21 दिसंबर, 2016 को सी.एस.आई.आर., आई.आई.सी.टी., तारनाका, उप्पल रोड, हैदराबाद में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों एवं उपक्रमों के लिए संयुक्‍त क्षेत्रीय राजभाषा सम्‍मेलन एवं पुरस्‍कार वितरण समारोह वर्ष 2016-17 का आयोजन
किया गया। सम्‍मेलन में आंध्रप्रदेश के माननीय राज्‍यपाल श्री एक्‍कडू श्रीनिवासन लक्ष्‍मी नरसिम्‍हन के कर-कमलों से पुरस्‍कार विजेताओं को पुरस्‍कार प्रदान किए गए। इस मौके पर मुख्य सचिव, तेलंगाना सरकार, श्री के. प्रदीप चंद्रा, राजभाषा विभाग के सचिव श्री प्रभास कुमार झा, संयुक्‍त सचिव डॉ. बिपिन बिहारी सहित केंद्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/उपक्रमों आदि के अधिकारी उपस्थित रहे।SUMMIT, Current Affairs, 
समारोह में अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए माननीय राज्‍यपाल श्री एक्‍कडू श्रीनिवासन लक्ष्‍मी नरसिम्‍हन ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा ही नहीं, हमारी राष्ट्रीय पहचान भी है। उन्‍होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की राजभाषा उसके नागरिकों के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक होती है तथा सरकार और नागरिकों के बीच राजभाषा एक सेतु का काम करती है। श्री नरसिम्‍हन का कहना था कि नागरिकों की सुविधा के लिए प्रशासन का पूरा कार्य जनता की भाषा में होना चाहिए। तभी सरकार की योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पहुंचेगा। उन्‍होंने कहा कि हिंदी भाषा राष्‍ट्रीय ही नहीं अंतरराष्‍ट्रीय पटल पर भी अभिव्‍यक्‍ति की सबल और प्रभावी संवाहिका है। हिंदी विश्‍व की एक सशक्त भाषा के रूप में उभर चुकी हैI विश्‍व के विभिन्‍न देशों में रह रहे भारतीय मूल के करोड़ों लोग हिंदी का बखूबी प्रयोग कर रहे हैं। भारतीय मूल के प्रवासियों द्वारा हिंदी को विश्‍व भाषा बनाने की दिशा में प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रूप में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा हर साल आयोजित प्रवासी भारतीय सम्‍मेलन, पूरे विश्‍व में फैले भारतीय उद्यमियों एवं व्‍यवसायियों को एकत्रित कर भारत की प्रगति में अपना योगदान देने के लिए एक उपयुक्‍त मंच प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में हिंदी एक महत्‍वपूर्ण कड़ी का काम कर रही है। हमें इस सांस्‍कृतिक सेतु को और सुदृढ़ बनाना है। उनका कहना था कि हमारी सभी छोटी बड़ी भारतीय भाषाएं और बोलियां हमारी सांस्‍कृतिक धरोहर हैं । इस धरोहर की सजग होकर रक्षा करना हर भारतीय का पुनीत कर्तव्‍य है।



कार्यक्रम में राजभाषा हिंदी की महत्‍ता बताते हुए राजभाषा विभाग के सचिव श्री प्रभास कुमार झा ने कहा कि दक्षिण भारत की संस्‍कृति बहुत महान है तथा यहां की भाषाओं का अपना महत्‍व है। सभी भाषाएं आपस में काफी करीब होती हैं। राजभाषा विभाग एक पथप्रदर्शक के रूप में कार्य करता है और सभी कार्यालयों के प्रत्‍येक व्‍यक्ति के स्‍वाभिमान का प्रश्‍न है कि वह राजभाषा में कार्य करे।

उन्‍होंने कहा कि राजभाषा और जन भाषा के बीच की दूरी को खत्‍म करने की आवश्‍यकता है तथा हिंदी भाषा में सभी भाषाओं के प्रचलित शब्‍दों को समाहित कर राजभाषा के प्रचार-प्रसार का कार्य करना आसान है। उनका कहना था कि भारत एक बहुभाषी देश है। यहां विभिन्‍न राज्‍यों में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं। हमारी सभी भारतीय भाषाएं और बोलियां हमारी सांस्‍कृतिक एवं राष्ट्रीय धरोहर हैं। अपनी भाषायी धरोहर की सजग होकर रक्षा करना और इन्हें बढ़ावा देना हर भारतीय का कर्तव्‍य है। अपनी भाषा के प्रति लगाव और अनुराग हमारे राष्‍ट्र  प्रेम का ही एक रूप है। अपनी भाषा में मौलिक लेखन से अभिव्‍यक्‍ति बहुत ही सहज और स्‍वाभाविक होती है, जो कि अनुवाद की भाषा से संभव नहीं है। हिंदी ने अपनी मौलिकता, सरलता एवं सुबोधता के बल पर ही भारतीय संस्‍कृति और साहित्‍य को जीवंत बनाए रखा है। हिंदी ने सभी भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोकर अनेकता में एकता की भावना को पुष्‍ट किया है। आज ज़रूरत इस बात कि है कि हम हिंदी को इसके सरलतम रूप में अपनाकर अपने सभी सरकारी और व्यक्तिगत कार्य हिंदी में करेंI

कार्यक्रम में अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए मुख्य सचिव, तेलंगाना सरकार, श्री के. प्रदीप चंद्रा ने कहा कि कोई भी भाषा तभी लोकप्रिय हो सकती है जब वह जन-मानस पर अपना अधिकार जमा ले। यह प्रेम तथा सद्भाव से हो और सभी भाषाओं को साथ लेकर राजभाषा में कार्य हो तो सभी के लिए आसान हो सकती है।

इससे पूर्व समारोह में सभी अतिथियों का स्‍वागत करते हुए राजभाषा विभाग के संयुक्‍त सचिव डॉ. बिपिन बिहारी का कहना था कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित किए जाने वाले इन सम्मेलनों एवं समारोहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन सम्मेलनों का उद्देश्‍य राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान ढूँढना और इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यालयों एवं कार्मिकों को प्रोत्साहित करना है। क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलनों के आयोजन से, राजभाषा से जुड़े विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हेतु एक सशक्त मंच उपलब्ध होता है तथा सरकारी कामकाज में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहन मिलता है।

डॉ. बिपिन बिहारी ने बताया कि राजभाषा विभाग सदा से ही राजभाषा प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाता आ रहा है। उन्‍होंने सूचना प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग के साथ सामंजस्य बिठाते हुए राजभाषा विभाग द्वारा सूचना प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से सभी नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों की रिपोर्टें विभाग को ऑनलाइन प्रेषित करने की सुविधा की जानकारी दी, जिसके अंतर्गत सभी नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियों को यूज़र आई डी और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं।  इसके द्वारा नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियां, वेबसाइट पर लॉग-इन करके बैठकों की कार्यसूची, कार्यवृत्त आदि सभी संगत सूचनाएं राजभाषा विभाग को ऑनलाइन भेज सकती हैं। यह सूचना पुरस्कारों के मूल्यांकन के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

राजभाषा भारती का विमोचन किया गया
कार्यक्रम में माननीय राज्‍यपाल श्री एक्‍कडू श्रीनिवासन लक्ष्‍मी नरसिम्‍हन के द्वारा राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित होने वाली पत्रिका राजभाषा भारती के अंक 148 (जुलाई-सितंबर 2016) का विमोचन किया गया। विदित हो कि गत 39 वर्षों से राजभाषा भारती का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है और राजभाषा प्रचार-प्रसार हेतु पूरे देश में 5000 प्रतियों का निःशुल्‍क वितरण किया जाता है। सम्‍मेलन के दौरान विभिन्‍न संस्‍थानों द्वारा प्रकाशित गृह-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

इन्‍हें मिला सम्‍मान
दक्षिण क्षेत्र में वर्ष 2015-16 के लिए ‘ग’ क्षेत्र क्षेत्रों में क्षेत्रीय राजभाषा पुरस्कार के अंतर्गत 50 से कम स्टाफ संख्या वाले कार्यालयों में केन्द्रीय विद्यालय संगठन, सिकंदराबाद प्रथम, दक्षिण क्षेत्रीय विद्युत समिति, बेंगलुरु द्वितीय तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, बेंगलुरु तृतीय स्‍थान पर रहे। वहीं 50 से अधिक स्टाफ संख्या वाले कार्यालयों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, मंगलूर प्रथम, मुख्य पोस्टमास्टर जनरल का कार्यालय कर्नाटक सर्किल द्वितीय एवं बेंगलूरु भारतीय रिजर्व बैंक, हैदराबाद तृतीय स्‍थान पर रहे। उपक्रमों में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, दक्षिणी क्षेत्र पारेषण प्रणाली-II, क्षेत्रीय मुख्यालय को प्रथम, बेंगलुरु भारतीय खाद्य निगम, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद को द्वितीय तथा हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हैदराबाद को तृतीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ। बैंकों की श्रेणी में विजया बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय (दक्षिण) बेंगलूरु प्रथम, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद द्वितीय तथा विजया बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय (उत्तर), बेंगलुरु तृतीय स्‍थान पर रहे। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति हैदराबाद (उपक्रम) को प्रथम हैदराबाद (बैंक) को द्वितीय तथा बेंगलुरु (बैंक) को तृतीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ।



दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों के अंतर्गत 50 से कम स्टाफ संख्या वाले कार्यालयों में क्षेत्रीय आयुर्वेदीय जीवनशैली संबंधी विकार अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम को प्रथम तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालय, केरल और लक्षद्वीप, तिरूवनंतपुरम को द्वितीय स्‍थान पर रहे। 50 से अधिक स्टाफ संख्या वाले कार्यालयों के अंतर्गत मुख्य पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय, केरल सर्किल, तिरुवनंतपुरम प्रथम भारतीय रिजर्व बैंक, तिरुवनंतपुरम द्वितीय तथा कॉर्डाइट फैक्टरी, अरूवनकाडु तृतीय स्‍थान पर रहे। उपक्रमों की श्रेणी में महाप्रबंधक दूरसंचार का कार्यालय, भारत संचार निगम लि., कोषि कोड प्रथम, प्रधान महाप्रबंधक कार्यालय, भारत संचार निगम लिमिटेड, कोच्चि को द्वितीय तथा भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण, तिरुवनंतपुरम को तृतीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ। दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में बैंकों की श्रेणी मेंयूनियन बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, एर्नाकुलम को प्रथम,स्टेट बैंक ऑफ ट्रावनकोर, अंचल कार्यालय कोच्चि को द्वितीय तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, सेलम केा तृतीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ।नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति कोच्चि (उपक्रम) प्रथम, कोयंबत्तूर (बैंक) द्वितीय एवंतिरुवनंतपुरम (उपक्रम) तृतीय स्‍थान पर रहे।
www.kiranbookstore.com

http://kiranprakashan.blogspot.in/
http://spardhaparikshahelp.blogspot.in/
http://advocate-vakil.blogspot.in/
http://bankexamhelpdesk.blogspot.in/
http://kicaonline.blogspot.in/
http://previous-questionpapers.blogspot.in/
http://freecareerhelp.blogspot.com/
http://kiranworkfromhome.blogspot.in/
http://kp-ahmedabad.blogspot.in/
http://kp-pune.blogspot.in/
http://kirancompetitivecurrentevents.blogspot.in/
http://iwantgovernmentjob.blogspot.in/
http://staffselectioncommission.blogspot.in/
http://pradeepclasses.blogspot.in/
http://rajasthan-government-jobs.blogspot.in/
http://medical-government-jobs.blogspot.in/
http://it-government-jobs.blogspot.in/
http://engineering-government-jobs.blogspot.in/
http://mp-government-jobs.blogspot.com/
http://punjab-government-jobs.blogspot.in/
http://tamil-nadu-government-jobs.blogspot.in/
http://karnataka-government-jobs.blogspot.in/
http://up-government-jobs.blogspot.in/
http://west-bengal-government-jobs.blogspot.in/
http://central-government-jobs.blogspot.in/
http://bihar-government-jobs.blogspot.in/
http://gujarat-government-jobs.blogspot.com/
http://maharashtra-government-jobs.blogspot.in/
http://government-jobs-kiran.blogspot.in/
http://sarkari-naukri-kiran.blogspot.in/
http://competitiveexamhelp.blogspot.in/
http://kiraninstituteforcareerexcellence.blogspot.com/
http://mpschelp.blogspot.com/
http://competitivemaths.blogspot.in/
http://competitiveenglish.blogspot.in/
http://competitivecurrentaffair.blogspot.in/
http://reasoningexams.blogspot.in/
http://teacherexams.blogspot.in/
http://policeexams.blogspot.in/
http://railwayexams.blogspot.com/
http://competitivegeneralstudies.blogspot.in/
http://ksbms.blogspot.in/
http://kirancurrentaffairs.blogspot.in/
http://upscmpsc.blogspot.in/
http://www.kirannews.in/
http://www.pratiyogitakiranonline.com/
http://ap-andhrapradesh-jobs.blogspot.in/