Tuesday, January 24, 2017

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा पशु संपत्ति के सन्दर्भ में नियमों का एक नया मसौदा जारी किया गया

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा पशु संपत्ति के सन्दर्भ में नियमों का एक नया मसौदा जारी किया गया गौरतलब है कि भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (Ministry of Environment & Forests) द्वारा देश के पशुधन बाज़ारों को विनियमित करने तथा व्यापारियों एवं अवैध तस्करों द्वारा अधिगृहित पशु संपत्तियों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से नियमों का एक नया मसौदा प्रस्तुत किया गया है| ध्यातव्य है कि पशुधन बाज़ार एवं देखभाल तथा पशु संपत्ति के रखरखाव संबंधी नियमों 2016 (The Regulation of Livestock Markets and Care and Maintenance of Case Property Animals Rules, 2016) के विनियमन के तहत, पहली बार, पशु संपत्ति मामलों एवं पशु बाज़ारों की स्थापना के संबंध में दिशा निर्देश जारी किये गए हैं| गौरतलब है कि इस नए मसौदे के अंतर्गत पशुधन बाज़ारों (Animal Markets) को विनियमित करने के साथ-साथ पशुओं पर किसी तरह का निशान लगाने अथवा उनकी ब्रांडिंग करने (Branding of Animals), उन पर चित्रकारी करने तथा उन्हें आभूषण पहनाने पर भी निषेध (Prohibition) है| इसके अतिरिक्त, कईं अनिवार्य नियमों को लागू करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि उक्त विषय के संबंध में जब तक मामला न्यायालय के समक्ष लंबित है, (मामले से संबंधित पशुओं को) पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals) के अंतर्गत गौशालाओं (Cow shelters) अथवा पशु कल्याण संगठनों (Welfare Organizations) को सौंप दिया जाएगा| ध्यातव्य है कि इन नए मसौदा नियमों के तहत सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर, देश के प्रसिद्ध पशुधन बाज़ारों एवं मेलों (राजस्थान के पुष्कर तथा बिहार में सोनपुर) में इन नियमों को विनियमित किया जाएगा| उल्लेखनीय है कि वर्तमान में देश में, पशुधन तथा पशुधन बाज़ारों के विषय में ऐसा कोई महत्त्वपूर्ण विनियमन उपस्थित नहीं है| हालाँकि वृहद् पशु संख्या धारक देश होने के बावजूद भारत में पशुओं की खरीद-फरोख्त के विषय में बिना किसी औपचारिक दस्तावेज़ी प्रक्रिया (Formal Documentation) के ही पशु-व्यापार किया जाता है|
ध्यातव्य है कि इन नियमों के प्रभाव में आने के पश्चात् पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत ज़िला प्रशासन (District Authorities) तथा अन्य राज्य-स्तरीय समितियों (State-level Societies) द्वारा पशु विपणन निगरानी समितियों (Animal Marketing Monitoring Committees) तथा पशु बाज़ार समितियों (Animal Market Committees) का गठन किया जाएगा|
इसके अतिरिक्त कुछ अन्य न्यूनतम आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया जाएगा| उदाहरण के तौर पर, पशुओं के रहने के लिये बेहतर आवास, पोषक तत्त्वों से भरपूर चारे, पीने का पानी, गर्भ धारण करने वाले पशुओं के लिये आवश्यक चिकित्सीय सुविधाओं के साथ-साथ कमज़ोर, वृद्ध, युवा एवं गर्भवती पशुओं के रहने के लिये पृथक बाड़ों की भी व्यवस्था की जाएगी|
 इतना ही नहीं बल्कि पशु चिकित्सकों के द्वारा संक्रामक रोगों से संक्रमित पशुओं का उचित उपचार एवं देखभाल भी की जाएगी|
पशु तस्करी के विषय में जाँच-पड़ताल 
गौरतलब है कि इन नए नियमों के अंतर्गत पशु तस्करी से संबंधित मामलों की जाँच-पड़ताल करने के लिये कुछ विशेष उपबंध भी किये गए है| यथा; किसी भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 100 किलोमीटर तथा राज्य सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे के भीतर पशु बाज़ार लगाने की अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी|ध्यातव्य है कि भारत-बांग्लादेश तथा भारत-नेपाल की सीमा पर बड़े पैमाने पर पशुओं की तस्करी की जाती है| पशु कार्यकर्ताओं के अनुसार,उक्त नियमों के लागू होने के पश्चात् पशुओं के इस अवैध व्यापार को रोकने में मदद मिलने की संभावना है| उल्लेखनीय है कि भारत में पशु बाज़ार एक बहुत ही अनियमित बाज़ार है, जिसका एक अहम भाग कसाई बाज़ार (Butchers Market) है| 
पशु संपत्ति के भविष्य का मामला
उपरोक्त नियमों में, पशु सम्पत्ति मामलों के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक ऐसा कोई मामला अदालत के अधीन रहता है तब तक मामले से संबंधित पशुओं की देखभाल एवं रखरखाव में होने वाले सभी खर्चों को अवैध गतिविधि में शामिल तत्त्वों के द्वारा ही वहन किया जाएगा| 
यदि अवैध गतिविधियों में शामिल तत्त्वों पर अपराध सिद्ध हो जाता है तो इन पशुओं को संबंधित गौशालाओं अथवा पशु कल्याण संगठनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा|
उक्त नियमों के अनुसार, इन गौशालाओं एवं पशु कल्याण संगठनों में रहने वाले स्वस्थ पशुओं को आम लोगों को गोद भी दिया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक अस्वस्थ एवं गंभीर रूप से बीमार पशुओं को यहाँ भर्ती करने के साथ-साथ उनकी बेहतर तरीके से देखभाल भी सुनिश्चित की जा सके|
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