Thursday, February 16, 2017

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में होगा पांच सब्सिडियरी बैंकों का विलय, कैबिनेट की मंजूरी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में होगा पांच सब्सिडियरी बैंकों का विलय, कैबिनेट की मंजूरी वैश्विक आकार का बड़ा बैंक बनाने की अपनी मंशा के तहत सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और इसके पांच सहयोगी बैंकों की विलय योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, लेकिन भारतीय महिला बैंक के बारे में कोई फैसला नहीं किया। एसबीआई में उसकी सब्सिडियरी बैंकों को मिलाने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में
बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा,‘मंत्रिमंडल ने (विलय) प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन बैंकों के बोर्डों के पास ये प्रस्ताव गए थे, जिन्होंने उसे मंजूरी दे दी थी। बैंकों के निदेशक मंडलों की सिफारिशों पर आज विचार हुआ और मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।'
गौरतलब है कि एसबीआई ने पिछले साल ही सब्सिडियरी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को अपने साथ मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद उसने इस प्रपोजल को सरकार के पास भेजा था। एसबीआई की पांच सहयोगी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर ऐंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद शामिल हैं।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री ने कहा,‘इस विलय के बाद यह एक बहुत बड़ा बैंक बन जाएगा, घरेलू लिहाज से ही नहीं बल्कि आकार के हिसाब से वैश्विक स्तर पर भी।’ मंत्री ने कहा कि इस विलय से जहां इन बैंकों की कोष लागत घटेगी वहीं परिचालन लागत में भी कमी आएगी। भारतीय महिला बैंक के एसबीआई में विलय के प्रस्ताव पर जेटली ने कहा,‘अभी इस पर विचार हो रहा है। हमने इस बारे में आज कोई फैसला नहीं किया।’
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर ऐंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। इन बैंकों के मर्जर के बाद जो एंटिटी बनेगी, उसके पास 37 लाख करोड़ का एसेट बेस और 50 करोड़ से अधिक कस्टमर्स होंगे। एसबीआई ने 2008 में सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र को अपने साथ मिलाया था। इसके दो साल बाद उसने स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का मर्जर अपने साथ किया था।

एसबीआई ने हमेशा कहा है कि वह सहयोगी बैंकों को अपने साथ मिलाना चाहता है। हालांकि, कैपिटल की कमी के चलते वह अब तक ऐसा नहीं कर पाया था। इन बैंकों की एंप्लॉयीज यूनियन भी मर्जर का विरोध कर रही हैं। सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को मिलाने के बाद एसबीआई का साइज इतना बड़ा हो जाएगा कि वह दुनिया के बड़े बैंकों का मुकाबला कर सकेगा। दिसंबर 2015 तक इस बैंक पास 22,500 ब्रांच और 58,000 एटीएम थे। अकेले एसबीआई की 16,500 ब्रांच हैं। उसकी 191 ब्रांच विदेश में हैं, जो 36 देशों में फैली हैं।
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