Thursday, March 9, 2017

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सार्वजनिक खरीदारी सरकार की आर्थिक गतिविधियों का एक बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा होती है| यही कारण है कि सार्वजनिक खरीदारी में सुधार लाना वर्तमान सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है| ध्यातव्य है कि इस दिशा में गवर्नेमेंट ई-मार्केटप्लेस (Government E-Marketplace - GEM) सरकार का एक बहुत साहसिक कदम है, जिसका उद्देश्य उन तरीकों में बदलाव लाना है जिनमें सरकारी मंत्रालयों और विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और केन्द्र सरकार के अन्य शीर्ष स्वायत्त निकायों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीदारी की जाती है| गवर्नेमेंट ई-मार्केटप्लेस का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा गठित सचिवों के दो समूहों की सिफारिशों के आधार पर किया गया है| 

इन सिफारिशों के अंतर्गत महानिदेशालय आपूर्ति एवं निपटान (Directorate General of Supplies and Disposal –DGS&D) में सुधार लाने के अलावा सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा खरीदी जाने वाली या बेची वाली विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के लिये एक समर्पित ई-बाजार की स्थापना की अवधारणा को प्रस्तुत किया गया था|
ध्यातव्य है कि इसके बाद ही वित्त मंत्री द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट भाषण में विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं के सन्दर्भ में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी चालित एक मंच की स्थापना करने की योजना प्रस्तुत की गई थी।
उल्लेखनीय है कि डीजीएस एंड डी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग की तकनीकी मदद से उत्पादों और सेवाओं, दोनों की खरीदारी के लिये जीईएम पोर्टल को विकसित किया गया है|
ध्यातव्य है कि जीईएम पर खरीदारी को सरकारी नियमों में आवश्यक परिवर्तन द्वारा सामान्य वित्तीय नियमावली के द्वारा अधिकृत किया गया है|
वर्तमान में जीईएम के पीओसी पोर्टल पर 150 उत्पाद श्रेणियों में 7,400 उत्पादों और परिवहन सेवाओं को किराए पर लेने की सुविधा उपलब्ध कराई गईं है|
ध्यातव्य है कि जीईएम पूरी तरह से कागज़ रहित, कैशलेस और प्रणाली संचालित ई-मार्केटप्लेस है जो न्यूनतम मानव इंटरफेस के साथ आम उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की खरीदारी में आवश्यक रूप से सक्षम है|
जीईएम के माध्यम से पारदर्शिता

गौरतलब है कि जीईएम विक्रेताओं के पंजीकरण तथा वस्तुओं की खरीद आदि करने और भुगतान प्रोसेसिंग में मानव हस्तक्षेप को समाप्त करने का कार्य करता है|
एक खुला मंच होने के कारण जीईएम सरकार के साथ व्यापार की इच्छा रखने वाले वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं के लिये कोई प्रवेश बाधा पैदा नहीं करता है|
हर कदम पर खरीदार उसके संगठन के प्रमुख, भुगतान प्राधिकारियों के साथ-साथ विक्रेताओं को ई-मेल अधिसूचनाएँ भेजी जाती हैं|
पीएफएमएस (Public Financial Management System – PFMS) और स्टेट बैंक ऑफ मल्टी ऑप्शन प्रणाली के साथ एकीकरण के माध्यम से जीईएम पर ऑनलाइन, कैशलेस और समयबद्ध भुगतान किया जाता है|
इतना ही नहीं रेलवे, रक्षा, प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य सरकारों के लिये भुगतान प्रणाली को सुविधाजनक बनाने हेतु वेब सेवाओं के एकीकरण का विस्तार किया जा रहा है|
उल्लेखनीय है कि इस कार्य की ज़िम्मेदारी व्यय विभाग को सौंपी गई है|
क्षमता को बढ़ावा प्रदान करने में सक्षम

जीईएम पर सीधी खरीदारी मिनटों में की जा सकती है क्योंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और उचित मूल्यों का पता लगाने के लिये ऑनलाइन उपकरणों के साथ पूरी तरह एकीकृत भी है|
अधिक कीमत की खरीदारी के लिये बोली/रिवर्स नीलामी जैसी सुविधाएँ सरकारी क्षेत्र में प्रचलित ई-खरीदारी प्रणालियों की तुलना में बहुत अधिक पारदर्शी और कुशल होती है|
अत: किसी बोली या नीलामी के सृजन के लिये खरीदार को अपने तकनीकी विनिर्देश तैयार करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उन्हें जीईएम पर पहले ही मानकीकृत कर दिया गया है| इसके लिये सभी पात्र आपूर्तिकर्ताओं को ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से अधिसूचित किया जाता है|
जीईएम पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद नए आपूर्तिकर्ताओं को भी अधिसूचित किया जाता है और उन्हें प्रणाली द्वारा 'पात्र' आपूर्तिकर्ता के रूप में माना जाता है| इसलिए जीईएम बोली/ नीलामी प्रतियोगिता, निष्पक्षता और गति तथा दक्षता सुनिश्चित करके उचित मूल्य का पता लगाने में मददगार साबित होती है|
बहुत जल्द ही जीईएम अन्य सार्वजनिक खरीदारी पोर्टलों से जानकारी हासिल करना भी आरंभ कर देगा जिससे यह सुनिश्चित हो जाएगा कि किसी अन्य सरकारी एजेंसी ने उसी या किसी अलग विक्रेता से वही वस्तु कम मूल्य में तो नहीं खरीदी है|
मूल्यों की तर्कसंगतता वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (Goods and Services Tax Network - GSTN) और भारतीय सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स/इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज गेटवे (Indian Customs Electronic Commerce/Electronic Data Interchange – EC/EDI Gateway) के एकीकरण के माध्यम से और मज़बूत हो जाएगी|  
जिससे खरीदार को किसी फैक्ट्री गेट पर मौजूद किसी वस्तु के मूल्य या उसे देश में आयात करने पर आने वाले मूल्य (वृद्धि) का पता लगाने में मदद मिलेगी| 
 सुरक्षित माध्यम

जीईएम पूरी तरह से एक सुरक्षित मंच है और इसके सभी दस्तावेजों पर खरीदारों और विक्रेताओं द्वारा विभिन्न चरणों में ई-हस्तक्षर किये जाते हैं|
इसके अंतर्गत आपूर्तिकर्ताओं के पूर्ववृत्तों का एमसीए 21,  आधार और पैन डेटाबेस के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है|
इसके अलावा सेबी पैनलबद्ध क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का भी आपूर्तिकर्ताओं के तृतीय पक्ष का मूल्यांकन कराने के लिये उपयोग किया जाता है|
इससे जीईएम पर व्यापार करने के इच्छुक आपूर्तिकर्ताओं की सत्यता के बारे में तत्परता और मज़बूत होती है|
जीईएम मौजूदा प्रणाली की तुलना में कहीं बेहतर प्रणाली है| मौजूदा प्रणाली में आपूर्तिकर्ताओं के अच्छे आचरण की गारंटी के लिये वित्तीय साधनों (भारी खरीदारी के लिये निविदाओं के मामले में बयाना जमाराशि) पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है| 
मौजूदा प्रणाली में उन आपूर्तिकर्ताओं के पूर्ववृत्त की कम मूल्य की खरीदारी (1 लाख रुपये तक) के लिये जाँच नहीं की जाती हैं, जिनका सरकारी संगठनों में भारी संचय मूल्य होता है| परन्तु यहाँ चाहे खरीदारी की कीमत कितनी भी कम या अधिक क्यों न हो, जीईएम सभी वेंडरों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन सत्यापन करता है|
सरकार की बचत

ध्यातव्य है कि निविदा/दर अनुबंध और सीधी खरीदारी दरों की तुलना में जीईएम पोर्टल के उपयोग में पारदर्शिता, दक्षता और सरलता के कारण जीईएम पर मूल्यों में काफी कमी हुई है| जीईएम पर औसत मूल्य कम से कम 15-20 प्रतिशत कम हैं और कुछ मामलों में यह मूल्य 56 प्रतिशत तक कम पाए गए हैं|
विनिर्देशों के मानकीकरण और जीईएम वस्तुओं के मानकीकरण के द्वारा मूल्यों में और कमी आने से मांग एकत्रीकरण और अधिक बढ़ने का अनुमान है| सामान्य उपयोग की अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं के लिये मांग एकत्रीकरण के परिणामस्वरूप 40,000 करोड़ रुपये की सालाना वार्षिक बचत होने का भी अनुमान है|
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