Monday, April 24, 2017

केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कल वाशिंगटन डीसी में आर्थिक नेताओं (आईएमएफसी प्लेनरी) के समग्र सत्र में भाग लिया

केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कल वाशिंगटन डीसी में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्त समिति (आईएमएफसी) के सीमित सत्र और विश्व आर्थिक नेताओं (आईएमएफसी प्लेनरी) के समग्र सत्र में भाग लिया .वित्त मंत्री ने वैश्विक मुद्रा और वित्तीय प्रणालियों की बढ़ती हुई कमजोरियों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा
निगरानी बढ़ाने का आह्वान किया ; वित्त मंत्री ने गतिशील उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का कोटा बढ़ाने के लिए आईएमएफसी विज्ञप्ति में दी गई प्रतिबद्धताओं का अनुपालन करने पर जोर दिया



केन्द्रीय वित्त मंत्री, रक्षा और भारत के कारपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने वाशिंगटन डीसी में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा एवं वित्त समिति के सीमित सत्र और विश्व आर्थिक नेताओं (आईएमएफसी प्लेनरी) के समग्र सत्र में भाग लिया। इस आयोजन में चुनिंदा वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों ने भाग लिया। इस विचार-विमर्श में वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण संसाधन आधार और शासन ढांचे और आईएमएफ के शासन ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा वैश्विक एकीकरण के लाभों के वितरण के रूप में समग्रता की महत्ता पर भी ध्यान दिया गया।

आईएमएफसी समग्र सत्र में वित्त मंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था और आईएमएफ की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था के उभरते जोखिमों के बारे में बल देते हुए आईएमएफ द्वारा वैश्विक मुद्रा और वित्तीय प्रणालियों में बढ़ती हुई कमजोरियों को दूर करने के लिए निगरानी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक नीति एजेंडा में समग्रता को एक सकारात्मक विकास के रूप में स्वागत करते हुए कहा कि इसे भारत लगातार विकास को बढ़ाने के तरीकों का पता लगाने में विश्वास करता है ताकि इसे अधिक समग्र बनाया जा सके। वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की स्पिंग बैठकों तथा अन्य कुछ बैठकों में भाग लेने के लिए आजकल वाशिंगटन डीसी के आधिकारिक दौरे पर हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ उर्जित पटेल, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव, श्री शक्तिकांत दास और मुख्य आर्थिक सलाहकार, अरविंद सुब्रमण्यन तथा अन्य अधिकारी भी उनके साथ इस दौरे पर गए हैं।

उन्होंने कहा कि अक्टूबर, 2016 से आर्थिक दृष्टिकोण बेहतर हो गया है और कुछ महत्वपूर्ण प्रगति देखी गयी हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओँ में विशेष रूप से अमेरिका में आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने के आधार पर 2017 में आर्थिक विकास की गति मजबूत होने का अनुमान है। कुछ बड़े उभरते बाजारों में भी हुई प्रगति से भी इसमें मदद मिली है। इन परिस्थितियों में, विकास के अनुकूल नीतियों के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध करके और पिछले साल हांग्जो शिखर सम्मेलन में जी -20 नेताओं द्वारा आह्वान की गई मुक्त और उचित व्यापार प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने तथा मैत्रीपूर्ण नीतियों को विकसित करने के प्रयासों के लिए आपसी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करना जरूरी है। उभरते हुए बाजार और विकास अर्थव्यवस्था (ईएमडीई) बाहरी झटकों के लिए कमजोर हैं इसके लिए मौजूदा आर्थिक रिकवरी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरतनी जानी चाहिए। संगठनात्मक सुधार और बफर निर्माण ईएमडीई के नीतिगत एजेंडे के नीतिगत घटक है जो निरंतर विकास को सुनिश्चित करते हैं।



अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भूमिका - वैश्विक सहयोग की वास्तुकला

वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते हुए जोखिम के लिए आईएमएफ द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत है। आईएमएफ को यह ज़िम्मेदारी पूरी तरह से निभाने में सक्षम होना चाहिए। इसे कोटा आधारित संस्था के रूप में काम करने की जरूरत है। कोष द्वारा हाल ही में किए गए कार्य परिवर्तित आर्थिक वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए कोटा के हिस्से की जरूरत की ओर इशारा करते हैं। हमें यह देखकर निराशा हुई है की 15वें जीआरक्यू पूरे करने की समयसीमा को बढ़ाकर 2019 की वार्षिक बैठक तक कर दी है। हम ईएमडीई की जरूरतों को बेहतर रूप से पूरा करने के लिए आईएमएफ लैंडिंग में सुधार लाने के किसी भी कदम का पूरी तरह समर्थन करते हैं। हम बहुपक्षीय उच्चतर संगत मेक्रो-इकोनॉमी पुनः संतुलन को बढ़ावा देने और वैश्विक नीतियों से विश्व नीतियों विश्लेणात्मक कवरेज को वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सुधार लाने के कार्य में आईएमएफ की भूमिका का स्वागत करते हैं।



निर्वाचन क्षेत्र में विकास

बांग्लादेश

बांग्लादेश ने वैश्विक मुहिम और घरेलू चुनौतियों के बावजूद लचीलेपन का प्रदर्शन किया है। इसके वास्तविक जीडीपी का प्रारंभिक अनुमान वित्त वर्ष 2016 के लिए 7.1 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2017 में 7.2 प्रतिशत होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2016 में प्रमुख मुद्रास्फीति दर घटी है। वार्षिक औसत सीपीआई मुद्रास्फीति दर जून 2016 में 5.9 प्रतिशत तक रही जबकि जून 2015 में 6.4 प्रतिशत थी। फरवरी 2017 में यह 5.4 प्रतिशत रही। बाह्य मोर्च पर मौजूदा चालू खाता शेष में जुलाई – फरवरी, 2017 के दौरान 1.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर का घाटा रहा जबकि वित्त वर्ष 2016 में इसी अवधि के दौरान 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त अधिशेष रहा। ऐसा मजबूत आयात बढ़ोत्तरी के कारण हुआ। वित्त वर्ष 2017 में वित्त घाटा 5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा। वित्त वर्ष 2016 में सकल निवेश जीडीपी का 29.7 प्रतिशत रही।



भूटान

वर्ष 2015-16 में वृद्धि दर बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो गई जो 2013-15 में 6.1 प्रतिशत तथा 2013-2014 में 4 प्रतिशत थी। पिछले वर्ष खनन, जलविद्युत संबंधी निर्माण जैसी सेवाओं में बढ़ोत्तरी से विकास दर में प्रगति हुई। उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति जो 2014-15 में घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई थी जो 2014-15 में 5.2 प्रतिशत रही। चालू खाता घाटा 2015-16 में एक प्रतिशत बढ़कर जीडीपी का 29.1 प्रतिशत हो गया। 2015-16 पिछले वर्षों में भारी घाटा जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए आयात के कारण हुआ। क्रेडिट प्रगति 2015 में बढ़कर 14 प्रतिशत हो गयी थी। वह 2016 में 17.4 प्रतिशत हो गयी।



भारत

भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है। इसकी वास्तविक जीडीपी बढ़ोत्तरी 2015-16 में 7.9 हुई जो कि 2014-15 में 7.2 थी। 2016-17 के लिए जीडीपी बढ़ोत्तरी का अग्रिम अनुमान 7.1 प्रतिशत रहा है। सीपीआई मुद्रास्फीति जो 2016 से घट रही थी उसमें फरवरी 2017 में 3.6 प्रतिशत पर साधारण बढ़ोत्तरी हुई। यह जनवरी 2016 में 3.17 प्रतिशत थी। विदेशी मुद्रा निवेश नीति में हाल के वर्षों में उदारी रूख अपनाने के कारण और रोजगार के सृजन की व्यापक संभावना है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 24 मार्च, 2017 को 367.93 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान था। चालू लेखा घाटा 1.3 पर स्थिर है जो 2014-15 और 2015-16 में क्रमशः 1.3 और 1.1 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट 2016-17 में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ ग्रामीण, कृषि और संबंध क्षेत्रों के लिए संसाधन आवंटन में महत्वपूर्ण बढोत्तरी की गयी है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत आवंटन में महत्वपूर्ण बढ़ोत्तरी की गयी है। 2017-18 का बजट कृषि, सामाजिक क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, रोजगार सृजन में निवेश बढ़ाने के हमारे संकल्प को मजबूत बनाता है। 2014 से हमने अपने अर्थव्यवस्था की पूरी संभावनाओँ को बढ़ाने के लिए गहरे संगठनात्मक सुधार लागू करने के प्रयास किए हैं।



श्री लंका

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में 2016 में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2016 में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इस वर्ष के दौरान 6.7 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि निर्माण संबंधी गतिविधियों में बढ़ोत्तरी के कारण हुई इसी दौरान सेवा क्षेत्र में वित्तीय सेवाओं, बीमा और दूरसंचार के विस्तार के कारण 4.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। मुद्रास्फीति राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के रूप में मापने पर 2016 में 4.2 पर स्थिर रही। इसने फरवरी 2017 में बढ़ोत्तरी का रूख दर्शाया और यह 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गयी। ऐसा देश में गंभीर सूखे के कारण हुआ। बाह्य मोर्च पर भुगतान संतुलन के व्यापार खाते में आयात पर खर्च बढ़ा है और 2016 के दौरान आयात आय घटी है। दिंसबर 2016 तक सकल आधिकारिक भंडार दिसंबर 2016 तक 6.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर का होने का अनुमान लगाया गया था जो 3.7 महीनों के आयात के समतुल्य है। 2016 में अमेरीकी डॉलर के मुकाबले रूपये में 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी, इसमें मार्च 2017 के अंत तक 1.1 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की।
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