Friday, May 12, 2017

एफआरबीएम पर मंत्रालय कर रहा विचार

एफआरबीएम 

राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) की सिफारिशों पर वित्त मंत्रालय विचार विमर्श कर रहा है। माना जा रहा है कि इस विमर्श के दौरान मंत्रालय मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के सुझावों का भी ध्यान रख सकता है। सुब्रमण्यन ने कहा है कि अगले 6 साल के लिए सभी तरह के सरकार के घाटों के लक्ष्य में प्राथमिकता राजकोषीय घाटे को दी जानी चाहिए। एफआरबीएम समिति ने 6 साल का मध्यावधि राजकोषीय प्रारूप के आखिरी वित्त वर्ष 2022-23 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत, राजस्व घाटे का लक्ष्य 0.8 प्रतिशत और केंद्र व राज्यों के संयुक्त कर्ज को 60 प्रतिशत की सीमा में रखने का लक्ष्य रखा है। 
 
अन्य सिफारिशों में राजकोषीय परिषद का गठन और राजकोषीय प्रारूप से हटने को लेकर सख्त प्रावधान परिभाषित करना शामिल है। समिति के सदस्य सुब्रमण्यन ने इस रिपोर्ट में असहमति नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि नीति निर्माताओं का ध्यान राजकोषीय घाटे को कम करने के बजाट प्राथमिक घाटे को कम किए जाने पर होना चाहिए। समिति के अन्य सदस्यों ने सुब्रमण्यन के असहमति नोट पर प्रत्युत्तर भी लिखे थे। समिति के अन्य सदस्यों में पूर्व सांसद एवं राजस्व एवं व्यय सचिव एनके सिंह, पूर्व वित्त सचिव सुमित बोस, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल और नैशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी के निदेशक रॉथिन रॉय शामिल थे। 
 
सुब्रमण्यन ने अपने असहमति नोट में लिखा था, 'मैं एक आसान आर्किटेक्चर का प्रस्ताव करूंगा, जिसका एक मकसद होगा कि इससे कर्ज में गिरावट आए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिचालन नियम का लक्ष्य स्थिर होना चाहिए लेकिन धीरे धीरे सरकार के प्राथमिक बैलेंस में सुधार होना चाहिए (गैर कर प्राप्तियों में से गैर ब्याज व्यय घटाकर), जब तक कि घाटा पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता।'
 
उनकी सलाह आधिकारिक रूप से एफआरबीएम सिफारिशों का हिस्सा नहीं है। उसके बावजूद सरकार के वरिष्ठ नीति निर्माता इस पर चर्चा कर रहे हैं कि प्राथमिक घाटे को एफआरबीएम प्रारूप में शामिल किया जाए या नहीं, जिसे शीतकालीन सत्र में विधेयक पारित होने पर कानूनी समर्थन मिल जाएगा। अगर इसे शीतकालीन सत्र में पारित किया जाता है तो यह मौजूदा एफआरबीएम ऐक्ट की जगह ले लेगा। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सुब्रमण्यन की सिफारिश ज्यादा करने योग्य नजर आती है।'इस चर्चा से जुड़़े एक और अधिकारी ने कहा, 'हालांकि यह चर्चा अभी शुरुआती स्तर पर है, हम न सिर्फ एफआरबीएम समिति की सिफारिशों पर चर्चा कर रहे हैं, बल्कि सुब्रमण्यन के प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है।' 

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